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डॉ. चंदन तिवारी को मिला प्रथम 'आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान'

हलचल
                
                                                         
                            सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने  अपने गुरु आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को याद करते हुए कहा, "पंडित जी का पूरा साहित्य और आलोचना शोध पर आधारित है। वे सदैव अपने छात्रों को शोध की गहराई में उतरने के लिए प्रेरित करते थे। उनका मानना था कि विषय में जितना डूबोगे, उतने ही मोती पाओगे। उन्होंने कहा कि आज पंडित जी इस बात से बेहद प्रसन्न होते कि उनके नाम पर एक ऐसे सम्मान की शुरुआत हुई है जो पूर्णतः शोध को समर्पित है।
                                                                 
                            

डॉ त्रिपाठी साहित्य अकादमी सभागार में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित प्रथम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर  राजकीय महाविद्यालय सलूंबर, राजस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चंदन तिवारी के शोध प्रबंध 'आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का भाषा चिंतन' को पहले आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान से सम्मानित किया गया। डॉ. तिवारी को सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह, सर्टिफिकेट, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्य  और 21 हजार रुपए की नगद धनराशि प्रदान की गई।  यह धनराशि सुरेंद्र शर्मा जी ने अपनी तरफ से डॉक्टर चंदन तिवारी को दी। इसके अतिरिक्त राजकमल प्रकाशन द्वारा उनके शोध प्रबंध पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। 

समारोह में साहित्यकार एवं प्रसिद्ध हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल राय, जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो. नीरज कुमार, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. वेद प्रकाश, राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी और आचार्य सहित साहित्य और अकादमिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। 

हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्ष डा. अपर्णा द्विवेदी ने शोध सम्मान शुरू किए जाने के विषय पर विस्तार से चर्चा की और ट्रस्ट के अन्य गतिविधियों पर  प्रकाश डाला। प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने अपनी विशिष्ट शैली में  चुटकी लेते हुए कहा, "अनपढ़ लोग कविता लिखते हैं और पढ़ने-लिखने वाले उन पर शोध करते हैं। कवि पसीने पर कविता लिखता है, जिसे पसीना बहाने वाला समझ नहीं पाता, लेकिन हम जैसे लोगों को उसे समझने के लिए पसीना बहाना पड़ता है।"

 मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार अविनाश चंद्र ने किया जबकि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष रत्नेश मिश्र ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
2 घंटे पहले

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