गुलशन में रुत नई है
हर सम्त बे-ख़ुदी है
हर गुल पे ताज़गी है
मसरूर ज़िंदगी है
सरचश्मा-ए-ख़ुशी है
छब्बीस जनवरी है
हर सू ख़ुशी है छाई
सब ने मुराद पाई
फिर जनवरी ये आई
यौम-ए-सुरूर लाई
साअ'त मुराद की है
छब्बीस जनवरी है
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