आज शीर्ष हिन्दी साहित्यकारों की जब भी बात की जाए तो धर्मवीर भारती का नाम उनमें हमेशा अग्रणी नामों में रहता है। वे अपनी साहित्यिक विविधता की वजह से भी इतने लंबे समय तक अपनी छाप छोड़ पाने में कामयाब रहे हैं, कि आज उनके जाने के इतने वर्षों बाद भी उन्हें इतने चाव से पढ़ा जाता है।
धर्मवीर भारती को गुनाहों के देवता से आज तक याद किया जाता है, और समझा जाता रहा है कि वह उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति है। या एक कालजयी कृति है, और ख़ासतौर से प्रेमियों के लिए ग्रंथ साबित हो चुकी है। परंतु क्या यह बेमानी नहीं है कि हम 'सूरज का सातवाँ घोड़ा' या 'अंधा युग' को गुनाहों के देवता से कम आंकते हैं। कई बार तो दरकिनार तक कर देते हैं।
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