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सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं न चन्द्रमा की ठंडक में लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है

भगवत रावत की कविता
                
                                                         
                            सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं
                                                                 
                            
न चन्द्रमा की ठंडक में
लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है
कि दुनिया में
करुणा की कमी पड़ गई है।

इतनी कम पड़ गई है करुणा कि बर्फ़ पिघल नहीं रही
नदियाँ बह नहीं रहीं, झरने झर नहीं रहे
चिड़ियाँ गा नहीं रहीं, गायें रँभा नहीं रहीं। आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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