इस सदन में मैं अकेला ही दीया हूँ;
मत बुझाओ!
जब मिलेगी, रोशनी मुझसे मिलेगी!!
पाँव तो मेरे थकन ने छील डाले
अब विचारों के सहारे चल रहा हूँ,
आँसुओं से जन्म दे-देकर हँसी को
एक मंदिर के दीये-सा जल रहा हूँ;
मैं जहाँ धर दूँ क़दम, वह राजपथ है;
मत मिटाओ
पाँव मेरे, देखकर दुनिया चलेगी!!
बेबसी, मेरे अधर इतने न खोलो
जो कि अपना मोल बतलाता फिरूँ मैं,
इस क़दर नफ़रत न बरसाओ नयन से
प्यार को हर गाँव दफ़नाता फिरूँ मैं;
एक अंगारा गर्म मैं ही बचा हूँ;
मत बुझाओ!
जब जलेगी, आरती मुझसे जलेगी!!
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