कुछ तो बेचैनियां बढ़ेंगी ही
बाग में बिजलियां गिरेंगी ही
फूल होंगे जहां भी गुलशन में
इश्क की तितलियां उड़ेंगी ही।
मन का मौसम विभाग कहता है
दिल पे कुछ बदलियां घिरेंगी ही
मेरे नाविक जरा सम्हल के चल
आज फिर आंधियां चलेंगी ही
मन किसी से कभी उचट जाए
दरमियां तल्खियां रहेंगी ही
प्यार गो हद से भी गुजर जाए
उसकी बेताबियां रहेंगी ही
उससे माना कि अब नहीं ताल्लुक
वक्त की साखियां रहेंगी ही
कितने भी फासले हों कुदरत से
उसकी सरगर्मियां रहेंगी ही
मां की आंखों में सदा बेटे की
कुछ तो शैतानियां रहेंगी ही
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