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कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया कुछ बोझ अपना बँट गया: शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया  कुछ बोझ अपना बँट गया: शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
                
                                                         
                            गति प्रबल पैरों में भरी 
                                                                 
                            
फिर क्यों रहूं दर दर खड़ा 
जब आज मेरे सामने 
है रास्ता इतना पड़ा 
जब तक न मंजिल पा सकूँ, 
तब तक मुझे न विराम है, 
चलना हमारा काम है। 

कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया 
कुछ बोझ अपना बँट गया 
अच्छा हुआ, तुम मिल गई 
कुछ रास्ता ही कट गया 
क्या राह में परिचय कहूँ, 
राही हमारा नाम है, 
चलना हमारा काम है।  आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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