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'परिंदों' के लिए कहे गए शेर

bird shayari collection
                
                                                         
                            

टहनी पे ख़मोश इक परिंदा
माज़ी के उलट रहा है दफ़्तर
- रईस अमरोहवी


इक परिंदा अभी उड़ान में है
तीर हर शख़्स की कमान में है
- अमीर क़ज़लबाश

परिंदा जानिब-ए-दाना हमेशा उड़ के आता है
परिंदे की तरफ़ उड़ कर कभी दाना नहीं आता
- अदीम हाशमी


निकाल लाया हूँ एक पिंजरे से इक परिंदा
अब इस परिंदे के दिल से पिंजरा निकालना है
- उमैर नजमी

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5 वर्ष पहले

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