टहनी पे ख़मोश इक परिंदा
माज़ी के उलट रहा है दफ़्तर
- रईस अमरोहवी
इक परिंदा अभी उड़ान में है
तीर हर शख़्स की कमान में है
- अमीर क़ज़लबाश
परिंदा जानिब-ए-दाना हमेशा उड़ के आता है
परिंदे की तरफ़ उड़ कर कभी दाना नहीं आता
- अदीम हाशमी
निकाल लाया हूँ एक पिंजरे से इक परिंदा
अब इस परिंदे के दिल से पिंजरा निकालना है
- उमैर नजमी
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