भारत रत्न लता मंगेशकर को सुर-साम्राज्ञी कहा जाता है। उन्होंने फ़िल्मी दुनिया को एक से बढ़कर एक हिट दिए। यदि फ़िल्मी-गीतों को सदाबहार कहा गया तो संभवत: वह उनकी आवाज़ के कारण ही कहा गया होगा। लता जी ने 30 से ज़्यादा भाषाओं में फ़िल्मी और ग़ैर-फ़िल्मी गाने गाए हैं, ग़ैर-फ़िल्मी में ग़ज़लें भी शामिल हैं। पढ़े वह ग़ज़लें जिन्हें लता जी के कंठ की वीणा मिली।
आँख से आँख मिलाता है कोई / शकील बदायुनी
आँख से आँख मिलाता है कोई
दिल को खींचे लिए जाता है कोई
वाए हैरत कि भरी महफ़िल में
मुझ को तन्हा नज़र आता है कोई
सुब्ह को ख़ुनुक फ़ज़ाओं की क़सम
रोज़ आ आ के जगाता है कोई
मंज़र-ए-हुस्न-ए-दो-आलम के निसार
मुझ को आईना दिखाता है कोई
चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल
हौसला किस का बढ़ाता है कोई
सब करिश्मात-ए-तसव्वुर हैं 'शकील'
वर्ना आता है न जाता है कोई
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले
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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी / मिर्ज़ा ग़ालिब
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