वो शाम कुछ ख़ामोश थी,
हर बात भी ख़ामोश थी,
वो कल भी दिल के पास थी,
वो आज भी एहसास है।
झुकी हुई निगाह में,
कोई अधूरी बात थी,
दबी-दबी सी हँसी में,
कोई मीठी सी याद थी।
मैं सोचता था चाँद भी,
कहीं उसको निहारता है,
न जाने क्यों ये दिल मेरा,
उसी को पुकारता है।
मेरा ख़याल है अभी,
उस चाँदनी सी शाम में,
छुपी हुई सी चाह भी,
है आज तक जज़्बात में।
मैं जानता हूँ ये दिल भी,
उसी का नाम लेता है,
यही ख़याल है मुझे,
वो आज भी मुझे याद करती है।
वो शाम कुछ ख़ामोश थी,
हर बात भी ख़ामोश थी,
वो कल भी दिल के पास थी,
वो आज भी एहसास है।
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