आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्यार का पहला सावन

                
                                                         
                            याद आता है जब वो प्यार का पहला सावन।
                                                                 
                            
लगे श्रृंगार गीत प्यार का पहला सावन,

अनछुई बदली पहली बार छुई बादल ने,
रात की बात बताई थी सुबह काजल ने,
चांदनी उतरी लजाती हुई चंदा मिल से,
घटा की ओट में चुंबन लिया था चंदा ने।

गीत गाती है घटा थिरकने लगता मधुवन,
याद आता है जब वो प्यार का पहला सावन।

सोने के दिन थे और चांदी सी थीं वो रातें,
चुरा के नींद ले गईं मिलन की वो बातें,
प्यासे भंवरे ने होट अधखिली कली के छुए,
चमन में होने लगी सितारों की बरसातें।

याद जब आता प्यार में वो भीगता सावन।
किसी की याद दिलाता है बरसता सावन।

याद आता है जब वो प्यार का पहला सावन।
लगे श्रृंगार गीत प्यार का पहला सावन,
- अनिल भारद्वाज 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर