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रूप चुराया मेरा

                
                                                         
                            सबसे बड़ा कष्ट देकर भी मन नहीं भरा तेरा,
                                                                 
                            
तू ने मेरी हंसी छीन ली रूप चुराया मेरा।

तेरे मनमोहक सुंदर से
सुंदर चित्र बनाए,
सारी उम्र तुझे पूजा है
तुझ पर गीत बनाए।

मेरी बंसी की धुन छीन मथुर स्वर छीना मेरा,
तू ने मेरी हंसी छीन ली रूप चुराया मेरा।

कर्क रोग से बढ़कर कोई
रोग नहीं इस जग में,
पीड़ा दर्द कसक भर देता
जीवन की रग-रग में।

इंद्रधनुष अंतिम खुशियों का छीन लिया है मेरा,
तू ने मेरी हंसी छीन ली रूप चुराया मेरा।

तुझसे यही एक विनती है
वह पूरी कर देना,
सांसों के आखिरी छोर पर
मुझको दर्शन देना।

क्यों इतने दुख लिखे भाग्य में बता दोष क्या मेरा,
तू ने मेरी हंसी छीन ली रूप चुराया मेरा।

-अनिल भारद्वाज 
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3 महीने पहले

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