कहीं पूजा है तो ये कहीं पै इबादत है,
कहीं पै स्वप्न है ये कहीं पै हकीकत है,
शक्ल दोनों की एक सी है मगर नाम अलग,
कहीं ये प्रेम है तो कहीं पै मोहब्बत है।
- अनिल भारद्वाज एडवोकेट
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