उदासी में ढल गयी मुस्कराने
की अदा,
गुनगुनाती शाम जाने कब
ख़ामोश हो गई।
दिल की कहानी लब पे दबी
हीं रही,
दर्द-ए-ज़िगर आंखों से बयां
हो गयी।।
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