मेरे देश की माटी ने ऐसे-ऐसे लाल दिए
लहू निछावर करके जिसने हमको दिलाई आज़ादी
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई खून सभी का शामिल है
कुछ अहमकों को लगता है मिली भीख में आज़ादी
भगत, बिस्मिल्लाह, अशफाक उल्ला का ये नारा था
जब तक सांस लबों पर थी पैगाम था उनका आज़ादी
कर्ज़दार हैं माटी उनकी, हम भूल कैसे कुर्बानी
आने वाली नस्लों को पैगाम दिया कैसे मिली है आज़ादी
सरहद पे खड़े जवानों को सलाम करे राही
जब तक धड़कन है सीने में गूंजेगा नारा आज़ादी
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