भीड़ में एक चेहरा अचानक दिख जाता है,
बिना वजह दिल उसी तरफ मुड़ जाता है,
Butterflies in the stomach और पहली बारिश की भीगी हुई मिट्टी सा अहसास दिला जाता हैं
यही पहले हल्के खिंचाव की बात है,
दिलकशी (Attraction) इसी का नाम है।
अब उसका ख्याल दिन में कई बार आता है,
नाम सुने बिना भी दिल मुस्कुरा जाता है,
जैसे कोई गाना बार-बार याद आ जाता है,
और बिना सुने भी मन गुनगुना जाता है—
धीरे-धीरे दिल उसी ओर मुड़ने लगता है,
यही उन्स (Attachment) का रिश्ता बनता है।
अब उसकी खुशी अपनी खुशी लगने लगती है,
उसकी उदासी दिल में कहीं चुभने लगती है,
जैसे दो रास्ते मिलकर एक राह बन जाते हैं,
और मुसाफ़िर साथ-साथ चलने लग जाते हैं—
अब ये एहसास सिर्फ चाहत नहीं रहता,
यही मोहब्बत (Love) का सिलसिला शुरू होता है।
कभी दूरी, कभी वक्त आज़माने लगता है,
कभी दुनिया बीच में दीवार बनने लगता है,
पर दिल अंदर से बस इतना कह जाता है,
कि वो साथ है, ये भरोसा रह जाता है—
अंधेरी रात में भी जो रोशनी बची रहती है,
वही अकीदत (Trust) की सच्ची रीत रहती है।
अब प्यार ज्यादा बोलता नहीं, बस रहता है,
दुआ करते वक्त उसका नाम कहता है,
जैसे रोज़ सूरज बिना शोर के उग जाता है,
और चुपचाप सारी दुनिया रोशन कर जाता है—
अब आशिक़ इश्क़ माँगने से ज्यादा देने लगता है
यही से अब वो इबादत (Worship) कि तलाश करता हैं
जमाना कहता हैं तुम बदल से गए हो,
दिल के पीछे चलते-चलते पागल हो गये हो
जैसे पतंगा आग के पास चला जाता है,
जानते हुए भी फिर लौट नहीं पाता है
जहाँ होश पीछे और दिल आगे हो जाता है,
वहीं असली जुनून (Madness) अपनी जगह बना लेता है।
इसी तरह सात मुकाम होते है इश्क़ मे दिलकशी,उन्स,मोहब्बत ,अकीदत ,इबादत,जुनून
और अब हम इश्क के सातवें मुकाम पर हैं — मौत
सफ़र भी अपना होगा, मंज़िल भी अपनी होगी,
इश्क रहेगा, यादें रहेंगी, पर बातें अधूरी होंगी।
ये दुनिया अक्सर इश्क की दुश्मन ही रहती है,
इसीलिए कई कहानियाँ यहाँ अधूरी रहती हैं।
पर दूर कहीं इन पहाड़ों के पार एक मैदान होगा,
जहाँ ना दुनिया होगी, ना कोई इल्ज़ाम होगा।
मुसाफ़िर हैं हम भी, मुसाफ़िर हो तुम भी,
फिर किसी और सफ़र में, किसी और जहाँ पर,
यूँ ही किसी मोड़ पर हमारी मुलाक़ात होगी
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