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चिड़ियों की बात निराली: कविता

                
                                                         
                            चिड़ियों की बात निराली
                                                                 
                            
बैठ जाती डाली डाली
रोके ना उसको हवा तूफानी
आसमान की है वह दीवानी

पंख खोल के उड़ना जानती
कभी ना वह डरना जानती
निडरता की पाठ पढ़ी है
कभी ना वह हार मानती

सुबह सवेरे उठ जाती
हमको भी बिस्तर से जगाती
कर्तव्यों का एहसास दिलाती
कर्म जरूरी हमें बताती

उसको आजादी बहुत प्यारी
खुले आसमान में उड़ना जानती
तिनके तिनके चुन चुन कर
अपना आशियाना बनाती

ठंडी, गर्मी, सर्दी, बारिश
कोई नहीं करता उसको तंग
इसका एक अलग ढंग
भर देती जीवन में रंग

इसकी अदा सबसे जुदा
करती गमों को विदा
हो जाता दिल उस पर फिदा
चिड़ियों की बात निराली
बैठ जाती डाली डाली।।
-ममता तिवारी
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2 घंटे पहले

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