जब तक कि इश्क की मदहोशी में हो ना जाओ पूरी तरह मदहोश तुम,
जब तक कि इश्क की बेहोशी में हो ना जाओ पूरी तरह बेहोश तुम,
और जब तक कि तुम्हारे इस ह्रदय में मिलन की सच्ची तड़प ना जागे,
सचमुच तब तक तो अपने इस होश को भी समझो नहीं सच्ची होश तुम|
-मनस्व
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