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खामोशियां

                
                                                         
                            हर चीज़ की क़ीमत लिखा है
                                                                 
                            
किस्मत के उस नाम-ओ-निशाँ पर,
वक्त ने जो मुफ्त बाँटा,
उसे हमने अपने खामोशियों में दफ़न किया।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
51 मिनट पहले

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