दर्द होता है तो हाथों पे उठा लेता है
मेरी आँखों से वो अश्कों को चुरा लेता है
उस के मक़्सद को समझ उस की 'इबारत पे न जा
'इश्क़ तो नार को गुलज़ार बना लेता है
ये अदा उस की मुझे दूर न होने देगी
रूठ जाता हूँ तो सीने से लगा लेता है
ये जो ग़ुर्बत में उदासी का सबब है मत पूछ
मुझ से छोटा भी मुझे चार सुना लेता है
बात किरदार की करता ही नहीं है कोई
लोग कहते हैं बता कितना कमा लेता है
मेरे पुरखों का लगाया हुआ ये पेड़ 'मुनीर'
मेरे बच्चों को भी साए में बिठा लेता है
~ मुनीर अंजुम
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
कमेंट
कमेंट X