मुंतशिर लम्हों को समेटने के दीवार ही नहीं,
कायदे बनी हैं जो प्यार को रोकने के लिए,
जिससे सब कुछ कह दूं कोई यार ही नहीं,
कायदे बनी हैं जो प्यार को रोकने के लिए।
– ऋषभ भट्ट
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