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हिंदी कविता

                
                                                         
                            बिटिया है तो आने वाला कल है,
                                                                 
                            
सारी खुशियां तेरे साथ हर पल है।
बिटिया को बोझ समझकर क्यों जल्दबाजी करता है?
अरे मूर्ख बिटिया का दर्द क्यों नहीं समझ पाता है?
राजा दशरथ ने भी राज स्वयंवर रचाया था
बिटिया के सुख के लिए, राम सन्ग हाथ धराया था।
महलों की खुशियां सीता को रास ना आई,
सुकुमारी सीता हो गई महलों से पराई।
बिटिया की ब्याह ऊंची महलिया देख नहीं करना रे
उसकी अखियां कही बन जाए नहीं झरना रे।
किस्मत और नसीब को देती है दुहाई
कइसा खोजा महलिया रे भाई।
जिस महलिया में सुख चैन के लिए भेजा
पड़ी है बिटिया अकेला आके ले जा।
ऊंची महलिया नहीं, खुशियां देख ब्याहो रे
बिटिया की खुशी देख, मैं भी गंगा न्याहो रे।....... 
 
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32 मिनट पहले

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