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देश प्रेम

                
                                                         
                            जिनमें साहस हो बुलंद और हौंसले हो ज़ांबाज़ी
                                                                 
                            
भारतमाता का वो वीर तेज़ शमशीर हो जाता है

आसमान भी झुक जाता है और देता है सलामी
अपने वतन के लिए जब वीर शहीद हो जाता है

अपने सांसों के अंतिम दौर में देता है वो शहादत
चूम मिट्टी को वतन की और शूरवीर हो जाता है

धरती मां बांह पसारे सुला लेती जब अपनी गोद में
वतन का वो वीर इस धरती का तकदीर हो जाता है
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एक घंटा पहले

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