सारे रूपक सारे बिंब विधान अधूरे हैं
तेरे सम्मुख सबके सब उपमान अधूरे हैं ।
भक्त अधूरे होते हैं जैसे भगवान बिना ,
भक्तों के बिन वैसे ही भगवान अधूरे हैं ।
खुद से ही प्रारंभ न होता हो बदलाव अगर ,
युग परिवर्तन के सारे अभियान अधूरे हैं ।
अभी-अभी तो आए ही हो लो चल पड़े अभी
अभी न जाओ अभी मेरे अरमान अधूरे हैं ।
घर में घर के जैसा कुछ भी लगता नहीं मुझे ,
बिना तुम्हारे घर के सब सामान अधूरे हैं ।
तेरे बदन की खुशबू मुझमें ऐसी है पैबस्त
इत्र, अगर ,परफ्यूम, धूप ,लोबान अधूरे हैं ।
जिनमें प्यार मुहब्बत वाले फूल न शामिल हों ,
रिश्तों के वे सारे ही गुलदान अधूरे हैं ।
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व्यर्थ मेरे लिए हर नदी हो गई
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