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एक धुंधली सी निगाह

                
                                                         
                            एक धुंधली सी निगाह साफ देख पाती नही।
                                                                 
                            
बयार आकर गुजर जाती अंततः छूती नही।।

ये हाथ मेरे ही है पर अब इशारा नही करते।
खामोश लबों से कोई भी बात निकलती नही।।

कभी बसंत लेकर आई थी मेरी रूह के लिए।
आज उसकी मौजूदगी में तासीर लगती नही।।

गुलमोहर का रंग फीका पड़ता रहा 'उपदेश'।
इतना समझ लो कि मेरी प्यास बुझती नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक घंटा पहले

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