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प्रेम की उमंग

                
                                                         
                            समझो मेरे दिल को अपने दिल की तरह।
                                                                 
                            
चाहतें कुलबुलाने लगेगी मछली की तरह।।

तब महसूस कर पाओगे मेरे दर्द की दवा।
खुश होकर बाहों मे भर लोगे मर्द की तरह।।

मेरी चाहतों से बेख़बर होकर सोने न दूँगी।
हर तरफ हिलाऊँगी डूलाऊँगी पंखे की तरह।।

बची सहनशक्ति जबाव देने को है 'उपदेश'।
नजरअंदाज न कर पाऊँगी बगुले की तरह।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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57 मिनट पहले

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