फूल का खिलना
फूल का मुस्कुराना
याद रहेगा ,
डाली से टूटना
मिट्टी से जुड़ना
याद रहेगा,
गुलिस्तान से गुजरना
महक से लिपटना
याद रहेगा
~ विजय नगरकर
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