प्यार भले क्यों न करो मुझसे,
पर ऐतबार भरपूर रहेगा तुम पर।
ये दिल आज भी तुम्हारी अमानत है,
इसका हर इख़्तियार रहेगा तुम पर।
मैंने चाहत की कोई शर्त नहीं रखी,
बस यक़ीन का उधार रहेगा तुम पर।
तुम किसी और की दुनिया भी बन जाओ,
मेरा इंतज़ार मगर रहेगा तुम पर।
मेरी तन्हाइयों का हर मौसम,
हर अश्क़ का भार रहेगा तुम पर।
मैं शिकायत का लहजा भी भूल गया,
बस दुआओँ का अधिकार रहेगा तुम पर।
तुम मिलो या न मिलो, ये मुक़द्दर की बात है,
मगर दिल का करार रहेगा तुम पर।
जब ज़िक्र होगा मेरी मोहब्बत का,
हर अल्फ़ाज़ का इकरार रहेगा तुम पर।
एक दिन वक़्त भी गवाही देगा,
इश्क़ कितना बेशुमार था तुम पर।
प्यार भले क्यों न करो मुझसे,
पर ऐतबार भरपूर रहेगा तुम पर।
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