कभी तेरी तो कभी खुद की,मुझे तलाश रहती है।
जाने कौन सी जुस्तजू,यूँ मेरे आस-पास रहती है।।
कौन जाने, कब तक , गुजरेंगे इस इंतिहा से हम।
ये सोचकर, अब मेरी उदासी भी उदास रहती है।।
-यूनुस खान
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