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प्रेम में समर्पण की याद दिलाता ये दिलकश नग़मा

फिल्म ताजमहल
                
                                                         
                            जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा
                                                                 
                            
रोके ज़माना चाहे रोके ख़ुदाई तुमको आना पड़ेगा
जो वादा किया…


महबूब का इंतज़ार हो और मिलने का वादा किया हो तो ये नग़मा आपको आपके महबूब से मिलने की चाहत को और बढ़ा देता है। 1963 में आयी फ़िल्म ताजमहल का ये गाना प्यार करने वाले दो दिलों से वादे पर खरा उतरने की गुहार लगाता है। इस गाने को साहिर लुधियानवी ने लिखा है। सुरों के बादशाह मोहम्मद रफ़ी और सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने इसे आपनी दिलकश आवाज़ दी है। प्रदीप कुमार और बीना राय पर फिल्माए गए इस गाने को सुनकर आपको अपना वो समय भी याद आ जाता है जब आप आपने अज़ीज़ से मिलने के लिए कहते रहते हैं लेकिन ज़िंदगी की भाग-दौड़ में उनसे कभी मिल पाते हैं तो कभी नहीं मिल पाते। भागदौड़ के बीच जब हम अपने अज़ीज़ से मिलने का वादा कर दें तो आपका अज़ीज़ आपको यही कहता है कि, 

तरसती निगाहों ने आवाज़ दी है
मुहब्बत की राहों ने आवाज़ दी है
जान-ए-हया, जान-ए-अदा छोड़ो तरसाना तुमको आना पड़ेगा
जो वादा किया...


जी हां जब आप अपने अजीज से मिलने का वादा कर दें और आपके दिल में मिलने की चाहत के साथ-साथ इश्क़ के कई अरमान उमड़ने लगें। और निगाहें इंतज़ार में डूबते-डूबते बस महबूब की एक झलक को तरस रहीं हों, तो इस पर ये पंक्तियां आपको मिलने के उत्साह को और बढ़ा देती हैं। 

दिल भी यही कहता है कि 'जान-ए-हया 
जान-ए-अदा छोड़ो तरसाना तुमको आना पड़ेगा

ये माना हमें जां से जाना पड़ेगा
पर ये समझ लो तुमने जब भी पुकारा हमको आना पड़ेगा
जो वादा किया…


जब मुहब्बत की राहें भी अपने महबूब को पुकारने लगे और दिल की आवाज़ भी बेसुध होकर बुलाने लगे, तब कहीं जाकर आपका महबूब, जान-ए-बाहर अपनी सभी रुसवाइयां भुलाकर आपके करीब आते ही अपने प्यार के इज़हार करते हुए यही कहता है कि 

ये माना हमें जां से जाना पड़ेगा पर ये समझ लो 
तुमने जब भी पुकारा हमको आना पड़ेगा

ज़माने को भुलाकर किसी भी हद तक जाने की चाह

फिल्म ताजमहल पोस्टर

मुहब्बत में बहुत से इम्तिहान भी देने होते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आपका अज़ीज़ भी अपनी वफ़ा पर कोई इल्ज़ाम नहीं लेना चाहता। इश्क़ दोनों तरफ से बराबर होता है या यूं कहें कि इश्क़ के सौदे में बिना कुछ सोचे समझे आपका अज़ीज़ आपके पास आते ही यही कहता है कि, 

हम अपनी वफ़ा पे ना इलज़ाम लेंगे
तुम्हें दिल दिया है तुम्हे जाँ भी देंगे
जब इश्क़ का सौदा किया फिर क्या घबराना हमको आना पड़ेगा
जो वादा किया… 


चमकते हैं जब तक ये चांद और तारे
न टूटेंगे अब एहद-ओ-पैमां हमारे
इक दूसरा जब दे सदा होके दीवाना हमको आना पड़ेगा
जो वादा किया…


इन पंक्तियों से प्यार की उस गहराई का पता चलता है कि जब आपका अज़ीज़ आपके पास होता और उसके साथ ज़माने को भुलाकर किसी भी हद जा जाने की चाह होने लगती है। अपने महबूब के पास बैठकर एक-दूसरे से अपने प्यार भरे रिश्ते को चांद-तारों से जोड़ते हुए कभी न जुदा होने का वादा करते हैं। साथ ही एक-दूसरे से ये भी वादा करते हैं कि जब हम एक-दूसरे को दीवानों की तरह बुलायेंगे तो ज़माने की परवाह किये बगैर, सभी रुसवाईयों को भूलाकर मिलने आना पड़ेगा।

यूट्यूब पर मौजूद फ़िल्म ताजमहल का गीत 'जो वादा किया तो निभाना पड़ेगा...' 

 
4 वर्ष पहले

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