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इश्क़ की कचहरी- ओ रात के मुसाफिर, चँदा जरा बता दे 

Mohammad Rafi
                
                                                         
                            रोमांटिक युगल गाने की इतनी भोली जिरह कम ही देखने को मिलती है। मैं बात कर रहा हूँ 'मिस मैरी' फिल्म के 'ओ रात के मुसाफिर चँदा जरा बता दे' गाने की। रफी और लता द्वारा गाया यह गाना प्रेम की उस अवस्था को बयां करता है जब प्रेमी-प्रेमिका, एक दूसरे के प्रति पनप रहे प्रेम का 'कॉग्निजेंस' या यूं कहें कि संज्ञान नहीं ले पाते। और फिर इश्क़ के लिए एक अदालत बैठती है। इस अदालत के जज होते  हैं 'रात के मुसाफिर' - चाँद।
                                                                 
                            

ओ रात के मुसाफिर 
चँदा जरा बता दे 
मेरा क़ुसूर क्या है
तू फैसला सुना दे
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है भूल कोई दिल की

एक वर्ष पहले

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