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धर्मवीर भारती हर विधा के लेखक हैं, उनमें हर चीज़ के लिए एक नज़रिया दिखाई देता है

dharmveer bharti is writer of every genre
                
                                                         
                            

आज शीर्ष हिन्दी साहित्यकारों की जब भी बात की जाए तो धर्मवीर भारती का नाम उनमें हमेशा अग्रणी नामों में रहता है। वे अपनी साहित्यिक विविधता की वजह से भी इतने लंबे समय तक अपनी छाप छोड़ पाने में कामयाब रहे हैं, कि आज उनके जाने के इतने वर्षों बाद भी उन्हें इतने चाव से पढ़ा जाता है।

धर्मवीर भारती को गुनाहों के देवता से आज तक याद किया जाता है, और समझा जाता रहा है कि वह उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति है। या एक कालजयी कृति है, और ख़ासतौर से प्रेमियों के लिए ग्रंथ साबित हो चुकी है। परंतु क्या यह बेमानी नहीं है कि हम 'सूरज का सातवाँ घोड़ा' या 'अंधा युग' को गुनाहों के देवता से कम आंकते हैं। कई बार तो दरकिनार तक कर देते हैं।

वास्तव में धर्मवीर भारती के कृतित्व का गुनाहों के देवता से इतर मूल्यांकन शायद अभी तक हुआ ही नहीं है। वे सुधा और चंदर से कहीं आगे की चीज़ें माणिक मुल्ला की कहानी में लिख गए हैं। उन्होंने महाभारत के महत्वपूर्ण भाग को जिस तरह 'अंधा युग' के रूप में दर्शाया है वह उन्हें एक नाटककार के रूप में स्थापित करने के लिए काफी है।

'कनुप्रिया' में कविताओं की ऐसी सरलता और बनावट और कहाँ देखने को मिलेगी। धर्मवीर भारती ने हर तरह की कविताएँ लिखी हैं, या कहें कि हर एक विधा में भी लिखा है। 'ठेले पर हिमालय' पढ़ते समय कई अन्य यात्रा संस्मरणों की याद हो आती है। धर्मवीर भारती हर विधा के लेखक हैं, उनमें हर चीज़ के लिए एक नज़रिया दिखाई देता है, जो उनके साहित्य में झलकता है।
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5 वर्ष पहले

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