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आज का शब्द: चक्षु और सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की कविता- हार तुमसे बनी है जय

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- चक्षु, जिसका अर्थ है- दृष्टि, आँख, नेत्र, नयन। प्रस्तुत है सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता- हार तुमसे बनी है जय
                                                                 
                            

हार तुमसे बनी है जय,
जीत की जो चक्षु में क्षय।

विषम कम्पन बली के उर,
सदुन्मोचन छली के पुर,
कामिनी के अकल नूपुर,
भामिनी के हृदय में भय।

रच गये जो अधर अनरुण,
बच गये जो विरह-सकरुण,
अनसुने जो सच गये सुन,
जो न पाया, मिला आशय।

क्षणिकता चिर-धनिक की है,
पणिकता जग-वणिक की है,
राशि जैसे कणिक की है,
वाम जैसे है निरामय।

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एक दिन पहले

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