सारे रूपक सारे बिंब विधान अधूरे हैं
तेरे सम्मुख सबके सब उपमान अधूरे हैं ।
भक्त अधूरे होते हैं जैसे भगवान बिना ,
भक्तों के बिन वैसे ही भगवान अधूरे हैं ।
खुद से ही प्रारंभ न होता हो बदलाव अगर ,
युग परिवर्तन के सारे अभियान अधूरे हैं ।
अभी-अभी तो आए ही हो लो चल पड़े अभी
अभी न जाओ अभी मेरे अरमान अधूरे हैं ।
घर में घर के जैसा कुछ भी लगता नहीं मुझे ,
बिना तुम्हारे घर के सब सामान अधूरे हैं ।
तेरे बदन की खुशबू मुझमें ऐसी है पैबस्त
इत्र, अगर ,परफ्यूम, धूप ,लोबान अधूरे हैं ।
जिनमें प्यार मुहब्बत वाले फूल न शामिल हों ,
रिश्तों के वे सारे ही गुलदान अधूरे हैं ।
व्यर्थ मेरे लिए हर नदी हो गई ,
इतनी' प्यारी मुझे तिश्नगी हो गई ।
तीरगी के लिए मन ये' तड़पेगा' फिर ,
हद से' ज्यादा अगर रोशनी हो गई।
पूछता हूं मैं ' खुद से ही' खुद का पता ,
ज़िन्दगी इस तरह अजनबी हो गई ।
आपका साथ पाकर मेरी जिंदगी ,
रह न पाई मे'री आपकी हो गई ।
इक भ्रमर मनचला बाग में आ गया ,
और सहमी सी' हर इक कली हो गई ।
कृष्ण की बांसुरी सुन के हर गोपिका ,
बावली बावली बावली हो गई ।
जाने' कैसा तरक्की का' मौसम है' ये
फूल-सी जिंदगी शूल-सी हो गई ।
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