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गोविन्द गुलशन की ग़ज़ल: फूल से खिलते हैं ख़ुशबू सी बिखर जाती है

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कोई तस्वीर अगर दिल में उतर जाती है
                                                                 
                            
नींद आती ही नहीं रात ठहर जाती है

ज़िक्र जब होता है उस का तो ख़यालों में मिरे
फूल से खिलते हैं ख़ुशबू सी बिखर जाती है

टूट जाता है अगर दिल तो तमन्ना दिल की
कहने वाले यही कहते हैं कि मर जाती है

एक ही पल है बहुत ख़ुद को समझने के लिए
और उस पल के लिए 'उम्र गुज़र जाती है

ख़ाक हो जाता है ये जिस्म सभी जानते हैं
आत्मा का नहीं मा'लूम किधर जाती है

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4 दिन पहले

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