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तरुणा मिश्रा की ग़ज़ल:  ख़ुद को हम यूँ तबाह कर लेंगे

उर्दू अदब
                
                                                         
                            ख़ुद को हम यूँ तबाह कर लेंगे
                                                                 
                            
ख़ूबसूरत गुनाह कर लेंगे

तुम न मिल पाए कोई बात नहीं
रंज-ओ-ग़म से निबाह कर लेंगे

बंदिशें तोड़ कर ज़माने की
हम मोहब्बत की राह कर लेंगे

उस की आँखों में डूबने के लिए
अपने दिल से सलाह कर लेंगे

सारी दुनिया से हो के बे-परवा
उस की जानिब निगाह कर लेंगे

हम ने ऐसा कभी न सोचा था
इश्क़ हम बे-पनाह कर लेंगे

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16 hours ago

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