उसकी आँख में,
इक सपना पलने लगा,
सपने की महक,
सारे घर में,
फैलने लगी,
उम्मीद से भरी ,
उसकी मां ने,
उसके सपनों की,
बोली को पढ़कर,
उसे,
इजाज़त दे दी,
अपनी मर्ज़ी के,
रास्ते पर चलने की,
अनोखा है,
आज उसके,
अधरों का,
लाल रंग,
उसके,
दांत, चबा रहे हैं,
नमक लगी रोटी,
और,
रोटी का हर निवाला,
आशीर्वाद की तरह,
रक्त में, मिल,
उसकी ताकत
बनता जा रहा है।
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