आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चलने को तैयार

Dr. Rashmi
2:33
                
                                                         
                            चलने को तैयार प्रभुजी, चलने को तैयार
                                                                 
                            
निर्मोही संसार प्रभुजी, चलने को तैयार

खेला, खाया, धूम मचाया, खूब किया व्यापार
अब तो कर उद्धहार प्रभुजी, चलने को तैयार

धन-दौलत सब माया देखी, देखा जग-व्यवहार
पड़ा हूँ तेरे द्वार प्रभुजी, चलने को तैयार

जिया बड़े सलीक़े से मैं, किया है तुझसे प्यार
निर्भय-निर्विकार प्रभुजी, चलने को तैयार

खूब जिया जी भर के मैं तो, पाया सुख और सार
सौंप दिया सब भार प्रभुजी, चलने को तैयार

तुम बिन मेरा कौन है प्यारे, कौन है सच्चा यार
भवसागर कर पार प्रभुजी, चलने को तैयार

- © डॉ. रश्मि झा
rashmijha1909@gmail.com

- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर