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चिंतन,,खुशी के लिए

pavan sharma
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                            इस तपन से और कितना जलाओगे मुझे
                                                                 
                            
मेरी जमुना से कब मिलाओगे मुझे
मैं भी देखना चाहता हूं बरात अपनी
रोना धोना बंद करो कंधों पे सजालो मुझे
डरा नहीं हूं मैं थोड़ा इंतजार ख़ुशी का है
जरूरी तो नहीं लगाकर गले और जला दे मुझे
जाने कितने बगीचों का उजाड़ होती है लकड़ी
मेरे साथ खुद कितनी जिंदा हैं ये दिखाओगे मुझे
दुनियां की चाहत को हकीकत में जानना है
मत जलाओ इतना अभी सब को बताना है मुझे।

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3 वर्ष पहले

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