छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में बुधवार को आयोजित एक राष्ट्रीय परिसंवाद उस समय विवादों में आ गया, जब कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल और एक अतिथि साहित्यकार मनोज रूपड़ा के बीच तीखा संवाद हो गया। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।
यह कार्यक्रम “समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ” विषय पर आयोजित किया गया था। राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन साहित्य अकादमी, नई दिल्ली एवं हिंदी विभाग, गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। उद्घाटन सत्र यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम स्थित हॉल नंबर-1 में चल रहा था।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल अध्यक्षीय उद्बोधन के दौरान अपने जीवन के अनुभवों का जिक्र करने लगे। वीडियों में जो सुनाई दे रहा है उसके अनुसार,....'और उसके साथ बढ़िया वाली बिस्किट, क्रैक्जेक उस जमाने में बढ़िया बिस्किट हुआ करता था, 'गुड डे' अभी ताजा ताजा आया ही था। कहे, आलोक जी ! हम आपको अपने पिताजी की कविताएं सुनाएं ? अब मैं फंस गया, चाय अब गले में फंस गई, उतरती ही नहीं.... अब कविता भी सुनना पड़ेगा ! सबसे कठिन था।' इसके बाद कुलपति ने कहा- भाई साहब आप बोर तो नहीं हो रहे हैं। ये सवाल उन्होंने महाराष्ट्र के नागपुर से आए साहित्यकार एवं कथाकार मनोज रूपड़ा से किया।
कथाकार मनोज रूपड़ा ने कुलपति से विषय से हटकर बात न करने और मूल विषय पर केंद्रित रहने की बात कही। इस टिप्पणी से कुलपति नाराज हो गए और उन्होंने साहित्यकार के लहजे को अनुचित बताते हुए मंच से बाहर जाने को कहा। उन्होंने कहा, '' बहुत बडे़ आप कहानीकार और विद्वान लग रहे हो, मुद्दे पर ही आ रहा हूँ, बिना मुद्दे के कोई बात मैं कहता नहीं, मगर वाइस चांसलर से कैसे बात किया जाए शायद इसका विवेक आपको नहीं है। तो सीख लीजिएगा कभी, आपको बुलाया किसने था। ...दुबारा इनको बुलाइएगा मत, मैं आपको पब्लिकली कह रहा हूँ, इनको तमीज नहीं है- किससे कैसे बात की जानी चाहिए। और इनको (मनोज रूपड़ा को) अभी कहिए कि निकल जाए यहाँ से, आपका यहाँ कोई स्वागत नहीं है, आप जा सकते हैं निकलिए यहाँ से।
इसके बाद मनोज रूपड़ा और कुछ लोग कक्ष से बाहर चले गए। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद यह मामला पूरे दिन सेंट्रल यूनिवर्सिटी में चर्चा का विषय बना रहा। शिक्षाविदों और साहित्यिक जगत से जुड़े लोगों के बीच इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। घटना का छोटा सा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
मनोज रुपड़ा हिंदी के कथाकार हैं। वह तीन दशकों से भी अधिक समय से आर्थिक रूप से कमजोर व पिछड़े लोगों के स्वप्न, संघर्ष और पीड़ा को अपने लेखन में पिरोते आए हैं। उनके तीन कहानी संग्रह दफन और अन्य कहानियां, साज-नासाज, व टावर ऑफ लाइसेंस के साथ ही दो उपन्यास प्रति संसार और काले उपाध्याय प्रकाशित हो चुके हैं। मनोज रूपड़ा अमर उजाला शब्द सम्मान-23 में 'छाप' के अंतर्गत कथा वर्ग में अपने कहानी संग्रह ‘दहन ’के लिए सम्मानित किए जा चुके हैं।
3 सप्ताह पहले
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