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परवीन शाकिर: अश्क आँख में फिर अटक रहा है

parveen shakir famous ghazal ashq aankh mein phir atak raha hai
                
                                                         
                            


अश्क आँख में फिर अटक रहा है
कंकर सा कोई खटक रहा है

मैं उस के ख़याल से गुरेज़ाँ
वो मेरी सदा झटक रहा है

तहरीर उसी की है मगर दिल
ख़त पढ़ते हुए अटक रहा है

हैं फ़ोन पे किस के साथ बातें
और ज़ेहन कहाँ भटक रहा है

सदियों से सफ़र में है समुंदर
साहिल पे थकन टपक रहा है

इक चाँद सलीब-ए-शाख़-ए-गुल पर
बाली की तरह लटक रहा है
 

3 सप्ताह पहले

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