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कैफ़ी आज़मी: वो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है 

कैफ़ी आज़मी: वो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है
                
                                                         
                            कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ है 
                                                                 
                            
वो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है 
यही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ है 
यही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है 

इक ज़रा हाथ बढ़ा दें तो पकड़ लें दामन 
उन के सीने में समा जाए हमारी धड़कन 
इतनी क़ुर्बत है तो फिर फ़ासला इतना क्यूँ है 
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18 घंटे पहले

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