हकीक़त को छुपाया जा रहा है
सभी को बरगलाया जा रहा है
बहारों को बुलाया जा रहा है
मगर गुलशन उजाड़ा जा रहा है
जहां से हम बचा लाए थे इसको
दिल ए गाफिल दोबारा जा रहा है
जड़ें इस पेड़ की गहरी बहुत हैं
करीने से उखाड़ा जा रहा है
हवा है इंकलाबी, रोकने को
दीवारों को उठाया जा रहा है
ये छूते हौसले हैं आसमां को
जमीं पर क्यों उतारा जा रहा है
नुमाईश में हमें फिर पेश करने
हमें फिर से सजाया जा रहा है
थे वैसे भी कभी बिगड़े नहीं हम
हमें अब तक बनाया जा रहा है
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