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बस इतना ही काफी है...

                
                                                         
                            दिल लगाना न सही,
                                                                 
                            
तुम्हारा हाथ मिलाना ही काफी है।
तुम हो नहीं सकती मेरी,
मगर तुम्हारे होने का एहसास ही काफी है।

बेशक न देखूँ तुम्हारे चेहरे की तरफ,
तुम्हारे कदमों में मेरा झुकना ही काफी है।
बेशक न बनूँ तुम्हारे होंठों की हँसी,
तुम्हारी उदासी में मेरा आँसू बहाना ही काफी है।

तुम हो चाँद जैसी रोशनी,
उसमें से दिए जैसी रोशनी मेरे लिए काफी है।
तुम बेशक चलो किसी और के साथ
फूलों जैसी राहों में,
तुम्हारे कदमों से मैं काँटे हटा दूँ
बस इतना ही काफी है।

तुम्हें पाने की ख्वाहिश अब दिल में नहीं,
तुम्हें चाहना ही मेरे लिए काफी है।
तुम दूर रहकर भी अगर मुस्कुरा दो,
तो वो खबर ही मेरे लिए काफी है।

मैं नाम नहीं माँगता तुम्हारी ज़िंदगी में,
तुम्हारी यादों में एक कोना ही काफी है।
तुम्हारी राहों में साथ चल न पाऊँ अगर,
तो दूर से तुम्हें देखना ही काफी है।

मोहब्बत मुकम्मल हो ये ज़रूरी तो नहीं,
कभी अधूरी कहानी भी काफी है।
तुम मेरी न बन सको अगर,
तो तुम्हें सच्चे दिल से चाहना ही काफी है…
-भूपेंद्र कुमार शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

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