"मन से मैं एक फ़्रांसीसी नागरिक हूँ,
स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व का वारिस।
कैफ़े की मेज़ पर बैठा
क्रांति के सिद्धांत बघारता हूँ।
शरीर से — हाय! — मैं भारतीय हूँ,
भीड़ में धक्का खाता,
लाइन में खड़ा,
पहचानपत्रों के बोझ तले झुका।
मन में पेरिस की गलियाँ,
देह में धूल भरी सड़कें।
विचारों में वोल्तेयर की चिंगारी,
जेब में राशन कार्ड की पर्ची।
मैं ट्वीट में लोकतंत्र बचाता हूँ,
घर में चुपचाप समझौते करता हूँ।
मन से यूरोप की रोशनी,
शरीर से बिजली कटौती।
कितना अद्भुत है यह संतुलन!
आत्मा में एफिल टॉवर खड़ा है,
पर पासपोर्ट पर अशोकचक्र।
मन कहता है — “विव ला फ्रांस!”
देह पूछती है — “सब्सिडी मिली?”
दो नागरिकताओं का यह खेल,
दरअसल एक ही आईना है—
जहाँ आदर्श विदेशी हैं,
और वास्तविकता घरेलू।"
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