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जुमलों का बाजार

                
                                                         
                            हर और जुमलों का यह संसार था,
                                                                 
                            
पूछता हूं मैं, इस जुमलों के संसार से
कहीं मोहब्बत की दुकान,
तो कहीं इश्क की दुकान,
तो कहीं प्रेम की दुकान, तो कहीं झुठे दिखावेपन की दुकान तो कहीं नफरत की दुकान,
इन जुमलों के तराजू में जुमले ही जुमले
हर और जुमलों का यह संसार था,
पूछता हूं मैं इस जुमलों के संसार से
कहीं मानवता का पाठ, तो कहीं अधर्म का पाठ, कहीं सत्संगीत का ,
तो कहीं लड़ाईयां का वास,
देखे होंगे नफरत के यह पल,
पर जिंदगी तराजू का एक पलड़ा है,
हर और जुमलों का यह संसार था,
पूछता हूं मैं इस जुमलों के संसार से
कहीं सुंदरता का वास, तो कहीं रेगिस्तान का वास,
कहीं पीठ पीछे का जुमला, तो कहीं मन का जुमला
यह जुमले तमन्नाओं के और जुमले
जिंदगी की सच्चाई के ये फिके जुमले
यूं ही बता देते है जिंदगी का सफर,
हर और जुमलों का यह संसार था,
पूछता हूं मैं इस जुमलों के संसार से
पर इन जुमलों के शोर में ,
एक आवाज सुनाई पड़ती है,
रूबरू हूं आईने में जब मैं,
तो घबरा जाती है मेरी रूह,
खुद से मिलाता हूं जब मैं
बाजार के लफ़्ज़ों को छोड़कर,
सच्चे उस मुसाफिर को,
घर के सत्संग में यूं ही बुलाता हूं ,
हर और जुमलों का यह संसार था,
पूछता हूं मैं इस जुमलों के संसार से
 
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