हाँ,मैं गर्व से कहता ठाकुर हूँ
स्वाभिमान मेरी साँसों में है,
पर मेरी अपनी पहचान
किसी को नीचा दिखाने में नहीं।।
जाति मुझे संस्कार सिखाती है,
स्वाभिमान सिखाती घमंड नहीं—
और देश पर मर मिटना, देशभक्ति
ही मेरा अपना सबसे बड़ा धर्म है।।
मैंने अपने देश में तिरंगे से पहले
कभी भी कोई झंडा नहीं ओढ़ा,
हमें अपने मिट्टी की सौगंध है—
इंसानियत को कभी नहीं छोड़ी।।
सीना तना है अपना मेरा ,
पर दिल सबके लिए खुला है,
मेरे स्वाभिमान में भी सदैव रक्षा
और भाईचारे का उजाला है।।
नहीं नफ़रत मेरा रास्ता रहा ,
ना ही कभी भेद मेरा शस्त्र,
देश के काम आना ही सदैव
मेरे, जीवन का अपना मंत्र।।
हाँ, मैं ठाकुर हूँ, हाँ मैं ठाकुर हूँ
पर पहले हैं देशभक्त भारतवासी,
मेरी जाति भारतीयता मेरी जड़ है,
और देश मेरी पहचान सबसे प्यारी।।
-एम के सिंह
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