इश्क़ के दीवानों ने जबभी किया है इश्क़ पुर जुनून किया है,
इश्क़ ने मग़र न कल सुकून दिया है ना आज सुकून दिया है!
येह कमबख़्त आशिकी न कभी रास आई उस को जमाने में,
आशिक बेचारा मुहब्बत का मारा सदा ही बे-सुकून जिया है!
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