प्रभु श्रीकृष्ण एक महायोगी,
वो ही हैँ युग के एक कर्मयोगी,
कुरुक्षेत्र में धर्म ध्वजा के वाहक,
जीवन दर्शन के वो एक नायक,
समय को भी उन्होंने रोक दिया
समय का अहंकार भी टूट गया,
जीवन क्या है? कर्म क्या है?
मानव धर्म का मर्म क्या है?
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचने,
कर्म ही अधिकार है, कर्म ही पूजा है,
कर्म तो एक अनन्त साधना है,
साधित होना ही इसका परिणाम है,
उन्होंने ही सन्देश दिया था,
उनके मुख के वो शब्द समूह,
जो अनंतकाल से एक जीवन दर्शन हैं
श्रीमद्भागवत गीता में ही ये वर्णन है,
गीता जयंती ही वो महान दिवस है,
जय श्रीकृष्ण, जय श्रीकृष्ण, जय श्रीकृष्ण |
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