दीपक ने किया है श्रंगार ज्योति जगमगा उठी ,
सूनी संध्या मे आज पुनः आशाएँ जाग उठीं ,
ह्रदय के आँगन मे बहुत रह चुका है अंधेरा ,
अभी अभी तो हुआ है मन के आँगन में सवेरा ,
अब नव उपवन के नव फूल नव सृजन करेंगे ,
अब धरा के आँचल भी पुनः सुरभित होंगे ,
प्रकृति मे पुनः आशाओं का संचार जाग्रत होगा ,
वायुमंडल भी इस पुनर्मिलन का स्वागत करेगा ,
समय प्रहरी भी मधुर संगम का साक्षी बनेगा ,
स्मृति पटल पर ठहर जाएंगे समय के वो पल ,
विकल नैनो मे आज पुनः होगा हर्ष का नीर ,
दिशाएँ स्वागत करती हैं , रचित होगा नव नीड़ ,
उत्साह मे है क्षितिज आज पवित्र गठबंधन होगा ,
धरा और गगन के मिलन का साक्षी क्षितिज होगा ,
अधूरे मिलन के दीप आज फिर से जल उठे ,
अब मत आना विरह के मेघ इन्हे बुझाने के लिए |
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